'हाई प्रोटीन' का इतना शोर क्यों...? जानें छोटे-छोटे पैकेट में बंद 20-30 ग्राम प्रोटीन की पूरी हकीकत!
High Protein Product: भारत में पिछले कुछ सालों से प्रोटीन प्रोडक्ट्स की खपत काफी अधिक बढ़ गई है. ऐसे में कई कंपनीज मार्केट में आ गई हैं और उन्होंने रोजमर्रा की चीजों में प्रोटीन जोड़कर उन्हें ‘हाई प्रोटीन’ ब्रांडिंग के साथ मार्केट में उतार दिया है. ये प्रोडक्ट हेल्थ के लिए कितने फायदेमंद हो सकते हैं या फिर क्या ये सच में फायदेमंद हैं या फिर मार्केटिंग स्ट्रेटजी. इस बारे में एक्सपर्ट की राय जानेंगे.
High Protein Product in india: हाई प्रोटीन मिल्क, हाई प्रोटीन बार, हाई प्रोटीन आटा, हाई प्रोटीन ब्रेड….पिछले कुछ सालों में अगर आपने जब भी सुपरमार्के या ऑनलाइन ग्रॉसरी एप खोली होगी तो ये हाई प्रोटीन प्रोडक्ट का ट्रेंड साफ दिखाई देता है. अधिकतर खाने की चीजें अब हाई प्रोटीन वाली हो चुकी हैं. दूध हो या दही, ब्रेड हो या आटा, बिस्किट हो या बार…छोटे-छोटे पैकेट्स पर बड़े अक्षरों में लिखा है, ’20 ग्राम, 25 ग्राम, 30 ग्राम प्रोटीन’. सवाल यह है कि अचानक हाई प्रोटीन चीजों को लेकर इतना शोर क्यों मच गया है? क्या वाकई ये हाई प्रोटीन प्रोडक्स हेल्दी हैं या फिर यह एक नया मार्केटिंग हथकंडा बन चुका है?
इस बारे में Aajtak.in ने डायटीशियन, फिटनेस एक्सपर्ट और सेलेब्रिटी फिटनेस कोच से बात की और उनसे जाना कि क्या भारतीयों में प्रोटीन की इतनी अधिक कमी है? क्या हाई प्रोटीन प्रोडक्ट्स वाकई समाधान हैं या सिर्फ फूड इंडस्ट्री ने हाइप बना रखी है. साथ ही जाना कि आम आदमी को प्रोटीन के नाम पर क्या चुनना चाहिए और किससे बचना चाहिए?
भारतीयों में प्रोटीन इंटेक के आंकड़े क्या कहते हैं?
ICMR-NIN के अनुसार, स्वस्थ इंडियन वयस्कों के लिए प्रोटीन की रिकमेंड मात्रा 0.83 ग्राम/किलो बॉडी वेट है. यानी कि अगर किसी का वजन 70 किलो है तो उसे दिन में करीब 58.1 ग्राम प्रोटीन स्वस्थ्य रहने के लिए चाहिए.
ICMR-NIN के ‘What India Eats’ स्टडी के अनुसार, भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में 36 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 44 प्रतिशत लोग प्रोटीन की कमी से प्रभावि.
इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) और सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड सोशल स्टडीज (IFPRI) की रिपोर्ट का कहना है कि भारत में कई परिवार फलियां, डेयरी और एनिमल प्रोडक्ट्स जैसे प्रोटीन सोर्स की उपलब्धता के बाद भी पर्याप्त प्रोटीन का सेवन नहीं करते हैं.
तो फिर क्या भारत में हाई प्रोटीन प्रोडक्ट्स भारतीयों की फिटनेस जर्नी में अहम भूमिका निभा सकते हैं या भारतीयों में जागरुकता की कमी का फायदा उठाकर उनकी सेहत से और खिलवाड़ कर सकते हैं?
हाई प्रोटीन प्रोडक्ट का इतना क्रेज क्यों है?
मुंबई के पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल की क्लिनिकल डाइटीशियन रुतु धोडापकर (Rutu Dhodapkar) ने Aajtak.in को बताया, ‘आजकल प्रोटीन का क्रेज बन गया है, इसके पीछे एक मजबूत साइंस है. दरअसल, हड्डियां बनाने के लिए, इम्यूनिटी के लिए, मांसपेशियों को बनाने और रिपेयर करने के लिए, ब्लड शुगर को स्थिर रखने के लिए, पेट भरने के लिए प्रोटीन की अहम भूमिका होती है. इन चीजों को दुरुस्त रखने के लिए खाने के पैटर्न और खाने के तरीकों को बदलना होता है.
खाने के तरीके बदलने और अपने आपको थोड़ा मस्कुलर बनाने या फिर वेट लॉस के लिए लोग लो कार्ब, इंटरमिटेंट फास्टिंग और हाई प्रोटीन डाइट जैसे प्लान अपना रहे हैं, इस कारण फूड ब्रांड्स ट्रेंड के हिसाब से प्रोडक्ट्स को रिफॉर्म करके इसका सॉल्यूशन दे रहे हैं. आजकल बिजी लाइफस्टाइल में सही खाना खाने का बहुत कम समय होता है, इसलिए एक क्विक और पूरा खाना या स्नैक प्लान किया जा रहा है जो तेज और सुविधाजनक हो.’
मार्केटिंग के लिए ब्रांड्स लेबल को मॉडिफाई करते हैं, जिसमें किसी भी प्रोडक्ट पर बड़े-बड़े अक्षरों में 20-30 ग्राम प्रोटीन लिखा होता है जो कस्टमर का ध्यान अपनी ओर खींचता है.
ऑनलाइन फिटनेस और न्यूट्रिशन प्लेटफॉर्म फिटर के फाउंडर जितेंद्र चौकसे ने बताया, ‘प्रोटीन एक बहुत जरूरी मैक्रोन्यूट्रिएंट है, खासकर प्रोटीन की कमी वाले भारतीयों के लिए. हम भारतीय रोजाना की जरूरत से बहुत कम प्रोटीन खाते हैं. प्रोडक्ट्स में प्रोटीन हो भी सकता है और नहीं भी. भारत में कई प्रोटीन प्रोडक्ट्स में असली प्रोटीन की जगह मिलावटी या सस्ते अमीनो एसिड मिलाकर प्रोटीन की मात्रा अधिक दिखाई जाती है, जिसकी शिकायतें और सबूत पहले से मौजूद हैं.
हर प्रोडक्ट की हर बैच के साथ लैब टेस्टिंग होनी चाहिए और उनकी रिपोर्ट्स पब्लिक की जानी चाहिए. भरोसा बनाने की जिम्मेदारी ब्रांड्स की होनी चाहिए, पब्लिक की जानी चाहिए. भरोसा बनाने की जिम्मेदारी ब्रांड्स की होनी चाहिए, पब्लिक की नहीं. सिर्फ FSSAI कम्प्लायंस काफी नहीं है इसलिए किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें.’
सेलेब्रिटी फिटनेस कोच प्रसाद नंदकुमार शिर्के ने बताया, ‘ये जो मार्केट में हाई प्रोटीन प्रोडक्ट्स जैसे दूध, दही आदि जो क्लेम करते हैं तो मुझे लगता है ये सब मार्केटिंग स्ट्रेटजी है क्योंकि जहां तक मुझे पता है किसी हाई प्रोटीन प्रोडक्ट के 250 मिली में 7-8 ग्राम प्रोटीन हो सकता है.’
‘लेकिन कुछ प्रोडक्ट्स जो दावा करते हैं कि 100 ग्राम क्वांटिटी में हम आपको 25-30 ग्राम प्रोटीन देंगे तो वो आइडियली रूप से पॉसिबल नहीं है. हाल ही में
मैंने कुछ दिन पहले एक प्रोडक्ट देखा था जिसकी 100 ग्राम मात्रा में 50 या 60 ग्राम प्रोटीन था. तो मुझे लगता है ये सब मार्केटिंग स्ट्रैटेजी है.’
