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मुंबई मेयर पद पर लॉटरी में क्या-क्या ऑप्शन हैं, कौन से ऑप्शन आने पर किस दल की क्या परेशानी बढ़ेगी?

देश के सबसे अमीर मुंबई के नगर निगम बीएमसी के मेयर चुनाव पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं. मेयर के लिए पहले आरक्षण तय होता है और उसके बाद पार्षद नए मेयर का चुनाव करते हैं. ऐसे में लॉटरी सिस्टम के जरिए ओबीसी, एससी, एसटी और महिला आरक्षण तय होगा. 

महाराष्ट्र में बीएमसी सहित सभी 29 नगर महापालिका में अब बारी मेयर चुनाव की है. ऐसे में सभी की निगाहें मेयर पद के आरक्षण पर टिकी हुई हैं. शहरी विकास विभाग के द्वारा मेयर आरक्षण तय किया जाएगा. लॉटरी ड्रॉ से तय होगा कि किस नगर निगम में किस वर्ग और किस जाति का मेयर चुना जाएगा. गुरुवार को सुबह 11 बजे शहरी विकास मंत्रालय लॉटरी प्रक्रिया से तय करेगा. 

शहरी विकास मंत्रालय के काउंसिल चैंबर में लॉटरी प्रक्रिया से मेयर पद के आरक्षण तय किया जाएगा. राज्स के सभी 29 नगर निगमों की लॉटरी शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल की अध्यक्षता में निकलेगी. लॉटरी निकले के बाद ही तय होगा कि मुंबई सहित 29 शहरों के मेयर महिला और पुरुष में किस वर्ग का होगा. इसके अलावा सामान्य वर्ग, ओबीसी, अनुसूचति जाति या अनुसूचित जनजाति में किस कैटेगरी से होगा. 

महाराष्ट्र नगर महापालिका चुनाव के नतीजों में मुंबई सहित राज्य की 29 नगर निगमों में से तकरीबन 22 पर बीजेपी गठबंधन को बहुमत मिला है तो छह नगर निगम में शेख आसिफ की पार्टी ISLAM का मेयर बन सकता है. ऐसे में सबसे ज्यादा निगाहें मुंबई की बीएमसी मेयर पद पर टिकी हुई हैं, लेकिन आरक्षण के लॉटरी ड्रॉ से कई नगरनिगम के सीन बदल सकते हैं? ऐसे में राजनीतिक दलों के पास क्या-क्या विकल्प होंगे और उनकी क्या परेशानी बढ़ेगी?

 

लॉटरी ड्रॉ से तय होगी मेयर की कुर्सी
नगर निगम चुनाव के बाद अब सभी की नजरें मेयर की लॉटरी सिस्टम पर टिकी हुई हैं. शहरी विकास मंत्रालय के द्वारा सभी 29 नगर महापालिका के मेयर पद का आरक्षण तय किया जाएगा. शहरी विकास मंत्रालय के द्वारा मेयर पद के आरक्षण के लिए लॉटरी बारी-बारी से निकाली जाएगी.ऐसे में सबसे ज्यादा चर्चा मुंबई से पुणे और ठाणे के मेयर को लेकर है.

आरक्षण ड्रॉ यह तय करेगा कि मुंबई का कौन पार्षद मेयर पद की दौड़ में शामिल हो सकेगा, क्योंकि जिस श्रेणी के लिए आरक्षण घोषित होगा, उसी श्रेणी से आने वाले विजयी पार्षद ही मेयर पद के लिए पात्र होंगे. राज्य सरकार द्वारा मेयर पद के आरक्षण ड्रॉ का आयोजन गुरुवार को कर रहा है.  

बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर निगम है. बीएमसी में इस बार उद्धव ठाकरे के सियासी वर्चस्व को बीजेपी-शिंदे की सियासी केमिस्ट्री ने तोड़ दिया है, लेकिन मेयर की लॉटरी सिस्टम से अभी भी ठाकरे बंधुओं की उम्मीदें लगी हुई है. 

रोटेशन सिस्टम से तय होगा आरक्षण 

महाराष्ट्र में मेयर पद के लिए आरक्षण नए राउंड रॉबिन सिस्टम से किया जाएगा. महाराष्ट्र में मेयर का पद रोटेशन के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होता है. मुंबई के बीएमसी में पिछली बार मेयर का पद सामान्य के निकला थाा.ऐसे में सामान्य को लॉटरी में नहीं रखा जाएगा. इस तरह से महाराष्ट्र के बाकी 28 नगर महापालिका में पिछला मेयर जिस वर्ग और जिस कैटेगरी का था, उसे इस बार के लॉटरी सिस्टम में शामिल नहीं किया जाएगा. इस तरह से सभी की निगाहें आरक्षण की लाटरी सिस्टम पर ही टिकी हुई है.

मुंबई में इस बार के लॉटरी सिस्टम में सामान्य वर्ग को शामिल नहीं किया जाएगा. इस तरह से सभी की निगाहें आरक्षण की लाटरी सिस्टम पर ही टिकी हुई है. मेयर पद के लिए आरक्षण, जो अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), महिलाओं और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए रोटेशन के आधार पर तय किया गया था. बीएमसी मेंपिछली बार सामान्य वर्ग का मेयर था, जिसके चलते इस बार एससी, एसटी और ओबीसी से मेयर चुने जाने की उम्मीद है.

मेयर आरक्षण के लिए लॉटरी सिस्टम की प्रक्रिया कानूनी रूप से तय है. लॉटरी ड्रॉ के बाद पार्टियां अपने कैंडिडेट घोषित कर सकती हैं. मेयर का चुनाव कॉर्पोरेट द्वारा वोटिंग से होगा, लेकिन कैंडिडेट सिर्फ चुनी गई रिजर्वेशन कैटेगरी से ही होना चाहिए. ऐसे में लॉटरी सिस्टम से तय होने वाले मेयर का किस दल पर क्या असर होगा? 

मेयर पद एसटी के लिए रिजर्व होने पर क्या होगा?  

बीएमसी में अगर मेयर के लिए लॉटरी ड्रॉ में अनुसूचित जाति का आरक्षण आता है,तो भाजपा-शिंदे की शिवसेना गठबंधन की मुश्किल बढ़ सकती है.ऐसे में उद्धव ठाकरे की किस्मत की खुल सकती है, क्योंकि उनकी पार्टी से दो अनुसूचित जनजाति के पार्षद जीते हैं. शिवेसना और बीजेपी से एक भी पार्षद अनुसूचित जनजाति से नहीं जीतकर आया है.

बीएमसी चुनाव में उद्धव गुट वाली शिवसेना ने 65 सीटें जीतीं. यह 227 सदस्यों वाली बीएमसी में 114 सीटों के बहुमत से बहुत दूर है. इसके बाद भी उसके पास अनुसूचित जनजाति के दो नगर सेवक (पार्षद) हैं. मुंबई के बीएमसी वार्ड नंबर 53 से जितेंद्र वाल्वी और मुंबई के वार्ड नंबर 121 से प्रियदर्शिनी ठाकरेशिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर जीतकर आए हैं. 

vउद्धव ठाकरे किस्मत के दो इक्के लेकर बैठे हैं. इसलिए बहुमत न होने के बावजूद भी शिवसेना (यूबीटी) मुंबई में मेयर का पद हासिल कर सकी है,क्योंकि आरक्षण नियमों के अनुसार ST या SC पद उसी कैटेगरी के चुने हुए कॉर्पोरेटर को मिलते हैं, चाहे पार्टी की ताकत कुछ भी हो. ऐसे में देखना है कि उद्धव ठाकरे की लॉटरी लगती है कि नहीं? 

एससी की लॉटरी निकलेगी तब क्या होगा? 
बीएमसी में मेयर पद के लिए लॉटरी प्रक्रिया में अगर अनुसूचित जाति के आरक्षण निकलता है तो फिर उद्धव ठाकरे की शिवसेना का गेम बिगड़ जाएगा. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना गठबंधन अपना मेयर आसानी से बना लेगा. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना दोनों के पास दलित समुदाय के पार्षद जीतकर आए हैं. इसके अलावा बीजेपी के पास 89 और शिंदे की शिवसेना के पास 29 पार्षद हैं. 

मुंबई बीएसपी की कुल 227 सीटों में से बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना को मिलाकर 118 पार्षद हो रहे हैं. इस तरह से

बीजेपी अपना मेयर आसानी से बना लेगी जबकि उद्धव ठाकरे का ढाई दशक का वर्चस्व खत्म हो जाएगा. 

ओबीसी की लॉटरी निकली तो कौन होगा मेयर
बीएमसी के मेयर पद के लिए अगर ओबीसी की लॉटरी निकलती है तो भी बीजेपी और शिंदे की शिवसेना आसानी से अपना कब्जा जमा सकती हैं. बीजेपी और शिंदे की शिवसेना दोनों के पास ओबीसी समुदाय से पार्षद जीतकर आए हैं. इस तरह से बीजेपी और शिंदे गुट दोनों ही मेयर बनाने की स्थिति में होंगी. 

हालांकि, बीजेपी और शिंदे के बीच मेयर पद क लेकर खींचतान चल रही है. इसके चलते मेयर और उपमेयर सहित स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन पद के बीच समझौता का फॉर्मूल निकल सकता है. ओबीसी के सीट रिजर्व होने का झटका उद्धव ठाकरे की शिवसेना का होगा. महायुति आसानी ने अपना मेयर बना लेगी और उद्धव की सियासत पर असर डालेगी. 

महिला के नाम की लॉटरी निकलेगी तो क्या होगा 

मुंबई के मेयर पद के लिए अगर महिला आरक्षण निकलता है तो भी महायुति आसानी ने अपने मेयर बना लेगी. इस बार महायुति के दोनों घटकदल से महिला पार्षद जीतकर आए हैं. ऐसे में उसे कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन सियासी टेंशन उद्धव ठाकरे की शिवसेना को जरूर होगी. बीजेपी के लिए महिला मेयर सूट भी करेगी, क्योंकि उसेसियासी समीकरण साधने में आसानी होगी.

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